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Civil Aviation Industy To UP

Patna
Civil Aviation Industy To UP
December 24, 2011

    राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख अजित सिंह के कैबिनेट मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होने से यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस से उनका समझौता उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि केंद्र में मंत्री पद पाने के लिए भी हुआ था। इस समझौते से रालोद और कांग्रेस को क्या लाभ होने जा रहा है, यह तो उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव ही बतायेंगे, लेकिन अजित सिंह को तात्कालिक लाभ के रूप में केंद्र मे नागर विमानन मंत्रालय मिल गया।    केंद्रीय मंत्रीमंडल में उनकी वापसी ने इस धारणा को और भी मजबूत किया है कि वह सत्ता की कुर्सी हथियाने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकते हैं। उन्होंने एक ऐसे दल के मुखिया के रुपप में अपनी पहचान और पुख्ता की है जो किसी के भी पाले में जा सकता है। वह पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़े थे और उसके पहले समाजवादी पार्टी के साथ थे। हालांकि गठबंधन राजनीति के इस दौर में न कोई स्थायी मित्र होता है और न ही शत्रु, लेकिन इसमें संदेह नही कि ऐसे प्रसंग राजनीतिक मूल्यों-मर्यादाओं का उपहास उड़ाते हैं और आम जनता को इस निष्कर्ष की ओर ले जाते हैं कि राजनीति नैतिकता से दूर होती जा रही है। गठबंधन के नाम पर राजनीतिक दलों को कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। मंत्री पद की शपथ लेते ही अजित सिंह ने जिस तरह यह कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को     रालोद-कांग्रेस गठबंधन के रूप में बसपा के दमनकारी शासन का एक साफ विकल्प मिल गया है उस पर भरोसा करना कठिन है। कम से कम उनके इस दावे पर कोई यकीन करने नहीं जा रहा कि इस गठबंधन से उत्तर प्रदेश मे पैदा हुई लहर का असर देश भर मे महसूस किया जायेगा। ऐसे बयान उनके अपने दल के कार्यकर्ताओं को तो उत्साहित कर सकता है, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नहीं।    इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि अजित सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं, लेकिन यदि वह यह सोंच रहे हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में २२ सीटें जीतनेवाली कांग्रेस और १० सीटें जीतनेवाली उनकी पार्टी मिलकर कोई बड़ा करिशमा करने जा रही हैं तो ऐसा कुछ भी होने नहीं जा रहा। इस गठबंधन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने बलबूते सरकार बनाने के अपने ही दावे से पीछे हट गई है। जो भी हो, अजित सिंह के लिए नागर विमानन मंत्री बनना एक उपलब्धि है, लेकिन बात तब बनेगी जब वह इस मंत्रालय की दिशा सुधारने में सफल हो सकें। उन्हे इसका अहसास होना चाहिए कि सरकारी एअरलाइंस एअर इंडिया ही नही ब्लकि पूरा विमानन उधोग गंभीर संकट से गुजर रहा है। जहां एअर इंडिया ४३००० करोड़ रूपये के घाटे में डूबी हुई है वहीं ज्यादातर निजी एअरलाइंस भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। अजित सिंह नागर विमानन मंत्री के रूप में तब तक कुछ विशेष नहीं कर सकते जब तक सरकार नागर विमानन उधोग का उद्दार करने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करती है। यह ठीक है कि अजित सिंह इसके पहले उधोग, कृषि और खाध मंत्रालय संभाल चुके हैं, लेकिन यह कहना कठिन है कि वह विमानन छेत्र का भी कोई अनुभव रखते हैं।

    राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख अजित सिंह के कैबिनेट मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होने से यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस से उनका समझौता उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि केंद्र में मंत्री पद पाने के लिए भी हुआ था। इस समझौते से रालोद और कांग्रेस को क्या लाभ होने जा रहा है, यह तो उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव ही बतायेंगे, लेकिन अजित सिंह को तात्कालिक लाभ के रूप में केंद्र मे नागर विमानन मंत्रालय मिल गया।    केंद्रीय मंत्रीमंडल में उनकी वापसी ने इस धारणा को और भी मजबूत किया है कि वह सत्ता की कुर्सी हथियाने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकते हैं। उन्होंने एक ऐसे दल के मुखिया के रुपप में अपनी पहचान और पुख्ता की है जो किसी के भी पाले में जा सकता है। वह पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़े थे और उसके पहले समाजवादी पार्टी के साथ थे। हालांकि गठबंधन राजनीति के इस दौर में न कोई स्थायी मित्र होता है और न ही शत्रु, लेकिन इसमें संदेह नही कि ऐसे प्रसंग राजनीतिक मूल्यों-मर्यादाओं का उपहास उड़ाते हैं और आम जनता को इस निष्कर्ष की ओर ले जाते हैं कि राजनीति नैतिकता से दूर होती जा रही है। गठबंधन के नाम पर राजनीतिक दलों को कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। मंत्री पद की शपथ लेते ही अजित सिंह ने जिस तरह यह कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को     रालोद-कांग्रेस गठबंधन के रूप में बसपा के दमनकारी शासन का एक साफ विकल्प मिल गया है उस पर भरोसा करना कठिन है। कम से कम उनके इस दावे पर कोई यकीन करने नहीं जा रहा कि इस गठबंधन से उत्तर प्रदेश मे पैदा हुई लहर का असर देश भर मे महसूस किया जायेगा। ऐसे बयान उनके अपने दल के कार्यकर्ताओं को तो उत्साहित कर सकता है, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नहीं।    इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि अजित सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं, लेकिन यदि वह यह सोंच रहे हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में २२ सीटें जीतनेवाली कांग्रेस और १० सीटें जीतनेवाली उनकी पार्टी मिलकर कोई बड़ा करिशमा करने जा रही हैं तो ऐसा कुछ भी होने नहीं जा रहा। इस गठबंधन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने बलबूते सरकार बनाने के अपने ही दावे से पीछे हट गई है। जो भी हो, अजित सिंह के लिए नागर विमानन मंत्री बनना एक उपलब्धि है, लेकिन बात तब बनेगी जब वह इस मंत्रालय की दिशा सुधारने में सफल हो सकें। उन्हे इसका अहसास होना चाहिए कि सरकारी एअरलाइंस एअर इंडिया ही नही ब्लकि पूरा विमानन उधोग गंभीर संकट से गुजर रहा है। जहां एअर इंडिया ४३००० करोड़ रूपये के घाटे में डूबी हुई है वहीं ज्यादातर निजी एअरलाइंस भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। अजित सिंह नागर विमानन मंत्री के रूप में तब तक कुछ विशेष नहीं कर सकते जब तक सरकार नागर विमानन उधोग का उद्दार करने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करती है। यह ठीक है कि अजित सिंह इसके पहले उधोग, कृषि और खाध मंत्रालय संभाल चुके हैं, लेकिन यह कहना कठिन है कि वह विमानन छेत्र का भी कोई अनुभव रखते हैं।