Analysis Of Bihar Election By Amardeep Kushwaha

Updated on 08 November, 2020

3 चरणो में होने वाला बिहार (2020) इलेक्शन हुआ पूरा अब फाईनल परिनाम 10नवम्बर को दिखेंगा की ऊँट माहागतबंधंन की तरफ बैठेंगा की एनडीए की ओर।  ईवीएम में बंद हो गया हैं जो 10 को आयेंगा बाहर पर नुकसान तो हर हाल में बिहारी का ही होंगा क्योकी साफ सुथरे छवी के लोगो को न तो पार्टी ने ही बहुत तब्जोज्त दिया न ही जनता ने तभी तो पार्टीया सबक नही लेती न ही अपनी भूल सुधारती हैं आने वाली अगामी चुनवो में ....

क्रमश :-

1. बिहार एनडीए के दोनो बड़े घटकवाले नेताओ को आम चुनाव नही लड़ना जनता के पीच पर किसी भी सेफ सिट से मुख्यमंत्री/उपमुख्य मंत्री को ...

2. एनडीए ने स्थानिय मुद्दे को नरअंदाज को किया 2015 जैसे...

3. प्रत्याशीयो के चयन में देरी ...

4. एनडीए ने दलबदलू नेताओ को अपना चेहरा बनाकर (टिकट) सिंबल दिया रहा और अपना स्टार प्रचारक बनाना और बनाया ...

5. एनडीए ने अपने स्थानिय स्टार वर्करो को घर बैठा दिया (भाजपा) ओबीसी नेताओ को पहले के ही समान वैकवट समाज को काट-छाट कर प्रयोग किये इलेक्श के टाईम ही इधर से उधर से ये-ये समाज इतना-इतना वोट दे देगा और अपना पार्टी का कैदर इतना हैं ही हैं और बाकी के लोग हिन्दूत्त्व एवं राष्ट्रवाद के नाम पर इतना वोट (मतदान) कर ही देंगे जायेंगे किधर पर अपना गिरेबान नही देखे न ही अपना झोली देखे की इसमें कितना छेद हुअा रहा पहले से ही एक तरफ से झोले में वोट डालते रहे  तो दुसरी तरफ न जाने कितने तरफ से वोट गिरते रहे भाजपा की झोली से एनडीए की झोली से, एक भी नेता लोग एनडीए के झोला सिलने का प्रयास तक नही किया न ही छेद को बन्द करने का प्रयास किया बिहार चुनाव 2020 इलेक्शन के दिन तक न जाने क्यो न ही आगे भी एनडीए का कोई नेता अपना जिमेवारी समझेगा ये सब संगठन मंत्री एवं संगठन प्रभारी का बनता हैं जिसकी कोई जबाब देही नही दिखी अभी तक ले बिहार में न जाने ? ...                                  

6. एनडीए के सबसे बड़े घटक दल (भाजपा) ने कुशवाहा समाज को टिकट नही दिया, दिया तो सिर्फ एक वो भी मजबुरी में क्योकी पूर्व में ही भाजपा ने कुशवाहा समाज से 2 विधानपार्षद वाली सिट छिन चुकी हैं पहले ही जिसको बिहार ने देखा हैं करिब से |

7. जंगल राज-2 (लालु परिवार) का डर दिखाकर आप सत्ता को बार-बार नही पा सकते हैं, न ही आपको यादव समाज नेता मानेगा न ही आईकॉन ही अपना भाजपा को भ्रम हुअा रहा पहले भी और अभी आज भी कोई बाहरी यादव समाज से आनेवाले नेताओ का चेहरा दिखाकर और उनके बहकावे वाले सर्वे में यादव समाज को टिकट देना और दिलवाना वोट कटवा प्रत्याशी के रूप में देखते हैं बिहार के यादव समाज क्योकी बिहार में कुछ बुद्धीजीवी समाज के यादव लोग राजेश रंजन उर्फ पप्पु यादव को अपना नेता बिहार में और मिथिला ईलाका में हुकुमदेव नारायन यादव को नेता मानती हैं जिनके फोटो से पहले ही परहेज किये न ही एक सुने जिसको देखा हैं बिहार के लोगो ने अबकी बार जो की एक बड़ा फैक्टर हैं भाजपा के लिए ....                    

8. भाजपा नें ओबीसी (कुशवाहा समाज) को न तो संगठन में कोई बड़ी दायित्व वाला जिमेवारी नही दिया न ही मोदी सरकार में ही अभी तक ले कोई महत्वपूर्ण दायित्व दिया हैं  जिसको बिहार ने देखा हैं और भुगत भी रहा है संगठन बिहार में ...

9. डबल इंजन वाली सरकार के स्थानिय बड़े नेता COVID19 वैश्विक माहामारी कोरोना काल के दौरान जनता के फ्रेम से गायब रहे और जो भी छोटे-बड़े नेता (COVID 19) जो राहत सामग्री बाटकर पार्टी व सरकार की लाज बचाये रहे अपने निजी कोष से तो जिनको नरअंदाज करके टिकट नही दिया न ही उनको स्थानिय स्टार कैम्पनर बनाया ...

10. भाजपा ने पुराने घोड़े पर दाव लगाया जबकी लोकसभा चुनाव में 70साल के अनुभवी नेताओ को मार्गदर्शक मंडली में रखकर टीकट से दूर रखा गया आडवाणी जी, जोशी जी, शांता कुमार जी आदी नाम उदाहरण हैं ...

11. बिहार भाजपा संगठन का मुखिया पूर्व में रहे दुसरे दल के नेता को बनाना और भाजपा संगठन के विस्तार में भी ओबीसी समाज के चर्चित नेताओ को किनारे करना एवं इसमें दखल अंदाजी नही करना राष्ट्रिय नेतृत्व को ...

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