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Women Unsafe In Bihar: WC

News
Women Unsafe In Bihar: WC
August 18, 2012

शुक्रवार को पटना के राजनीतिक गलियारे में उस समय भूचाल आ गया जब महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना अपने बिहार दौरे के दौरान राज्य सरकार को जंगलराज की संज्ञा दी। आयोग सदस्य चारू ने सूबे में पिछले कुछ समय में महिलाओं के विरूद्द अपराधो में वृद्धि को बेहद शर्मनाक और राज्य सरकार पर धब्बा बताया। चारू खन्ना ने आगे कहा कि बिहार में महिलाएँ महफूज नहीं हैं क्योंकि अपराध पश्चात् अनुसंधान की जगह पुलिस पदाधिकारी द्वारा कारवाई के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना उस समय बिफर गईं जब महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना के सामने प्रदेश से 9 लड़कियाँ मिलने आयी और उनसे सीधे मुलाकात कर प्रशासन पर उन्हें प्रताड़ित कर केश वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाय़ा। इसके बाद उन्होनें कहा कि बिहार में जंगलराज है। इसके बाद उन्होंने महिला थाने का भी दौरा किया।

 

शुक्रवार को पटना के राजनीतिक गलियारे में उस समय भूचाल आ गया जब महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना अपने बिहार दौरे के दौरान राज्य सरकार को जंगलराज की संज्ञा दी। आयोग सदस्य चारू ने सूबे में पिछले कुछ समय में महिलाओं के विरूद्द अपराधो में वृद्धि को बेहद शर्मनाक और राज्य सरकार पर धब्बा बताया। चारू खन्ना ने आगे कहा कि बिहार में महिलाएँ महफूज नहीं हैं क्योंकि अपराध पश्चात् अनुसंधान की जगह पुलिस पदाधिकारी द्वारा कारवाई के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना उस समय बिफर गईं जब महिला आयोग की सदस्य चारू खन्ना के सामने प्रदेश से 9 लड़कियाँ मिलने आयी और उनसे सीधे मुलाकात कर प्रशासन पर उन्हें प्रताड़ित कर केश वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाय़ा। इसके बाद उन्होनें कहा कि बिहार में जंगलराज है। इसके बाद उन्होंने महिला थाने का भी दौरा किया।

बिहार के महिला थाने का उद्धघाट्न 24 जनवरी 2012 को भरपूर मिडिया कवरेज के बीच मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने नालंदा में किया था। लेकिन 6 महीने बीतने के बाद इस थाने में अभी तक सिर्फ 5 मामले दर्ज हूए हैं। जबकि बिहार के सभी जिलों से महिलाओं के विरूद्द हूए अपराधों को इस थाने में स्थांतरित कर तुरंत कार्यवाही करना ही इसका उद्देश्य था। लेकिन सरकार और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही का आलम यह है कि 6 महीनें बाद भी राज्य के इस पहले महिला थाने को स्थायी थानाध्यक्ष तक नहीं मिल पाया है। ASI अंजू कुमारी ही अब तक प्रभार देख रहीं है। जबकि सरकार ने हर जिला में एक महिला थाना खोलने की धोषणा की थी और इसके लिए 643 पदों का सृजन करने की बात की गई थी और 25.44 करोड़ रूपये का बज़ट सरकार ने पास किया था।

महिला आयोग सदस्य के आरोप के बारे में प्रतिक्रिया पूछने पर जदयू नेता ने कहा कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उनका आचरण मर्यादित और राजनीति से परे होना चाहिए।