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सच को दबाने की कोशिस

News
सच को दबाने की कोशिस
February 20, 2012

वैशाली जिले के आरटीआई कार्यकर्ता धनंजय कुमार झा पर पिछले दिनों हुए जानलेवा हमले ने यह साबित कर दिया है कि उनके द्वारा किये गए खुलासे से बहुत से भ्रष्ट्र लोगों को अति वेदना हुई है। जहां धनंजय के पिता बजरंग झा को हमले मे अपनी आंख खोनी पड़ी वहीं राज्य सूचना आयोग की पहल से इस मामले की गंभीरता का पता चलता है। देशभर में भ्रष्ट्र लोगों के खिलाफ खड़े आरटीआई कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर लगातार बढ़ रहे हमले... ने जहां स्थिति को चिंताजनक बना दिया है वहीं समाज के सभी लोगों को समाज के इन पहरेदारों के साथ खड़े होने की आवश्यकता है।

ज्ञातत्व है कि धनंजय की शिकायत पर ही गोरौल-भगवानपुर के मुखिया शिव शंकर राय को जेल तक  जाना पड़ा। इसके साथ ही न्यायालय ने उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लगा दिया है।

पिछले बर्ष 11 जून 2011 को मुंबई में मिड डे दैनिक के खोजी पत्रकार ज्योर्तिमय डे की मर्डर केस जांच में बहुत समय लग गया था और मुख्य आरोपी और षड्यंत्रकारी जिगना वोरा (पत्रकार) को भागने का भरपूर मौका था, हालांकि उसने अति-उत्साह में भागने की जरूरत नहीं समझी और गिरफ्तार कर ली गई। इस केस में 7 लोगों की गिरफ्तारी हुई और मकोका जैसे कठोर कानुन की जरूरत पड़ी। हालांकि अभी न्याय मिलने में अभी समय़ लगेगा। ज्ञातत्व है कि कोर्ट बाद में पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने के लिए 45 दिनों की अवधि बढाई थी। इसके दो माह बाद ही पूरे देश को हिला देने वाली घटना घटी। मध्य प्रदेश में ही 16 अगस्त को एक और सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता शेयला मसूद की दिन-दहाड़े हत्या भोपाल जैसे शहर में कर दी गई और पुलिस और जांच एजेंसियाँ 7 महीने गुजरने के बाद भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच पाई हैं।

आमलोगों की निष्क्रियता के कारण व्यवस्था में सुधार के लिए उठाये जानेवाले किसी भी आवाज  दबाना आसान होता है और हमारी वर्तमान व्यवस्था में आरटीआई कानुन ने जो शस्त्र इन सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी है उससे प्राप्त सूचनाओं के कारण देशभर में कानून तोड़नेवाले परेशान दिख रहें हैं। आरटीआई कार्यकर्ता जहां सामाजिक पहरेदार का काम कर रहें है आमजनों को सामने आकर ऐसे पहरूओं के साथ ढाल के रूप में खड़े रहने की जरूरत है।