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Bihar Art Theatre Festival In Kalidas Rangalaya

Patna
Bihar Art Theatre Festival In Kalidas Rangalaya
January 18, 2012

एक्सप्रेस संवाददाता, एस.अमित, पटना - राजधानी के गांधी मैदान स्थित राज्य के प्रमुख रंगमंच कालिदास रंगालय में इनदिनों बिहार आर्ट थियेटर के तत्वाधान के में महान रंगकर्मी मुखर्जी के जन्मदिवस के अवसर पर एक सप्ताह तक समारोह मनाया जा रहा है। प्रतिदिन एक या दो नाटकों का मंचन किया जा रहा है एवं इसमें प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। विभिन्न कला मंच और नाट्य ग्रुप द्वारा प्रस्तुति कर समाज को संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। बुधवार को यहां -आदमीयत महंगी है- नाटक का मंचन किया गया। वर्तमान व्यवस्था में पुलिस का विपरीत रवैया किस प्रकार इंसान को मदद का मुहताज बना देता है और सड़क पर घायल व्यक्ति के मदद के लिए कोई आगे नहीं आता है - क्योंकि कोई भी पुलिस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता। इस प्रकार बीच सड़क पर चोर द्वार चाकू मारे जाने के बाद सैकड़ो लोगों जूट जाते है पर सभी मूकदर्शक ही है - कोई उसे अस्पताल नहीं पहूँचाता- और अंततः उसकी मौत हो जाती है। कलाकारों के अत्यंत गंभीर अदाकारी और मुद्रा प्रदर्शन से दर्शक भाव विहोर हो गए और समूचा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले 15 जनवरी को यहां -चंपु चमार- हास्य नाटक का मंचन हुआ जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। ज्ञातत्व है कि पटना का कालिदास रंगालय यहां के स्थानीय और बाहरी कलाकारों के लिए एक ऐसा मजबूत मंच प्रदान करता है जिसपर से गुजरते हुए पटना के कई कलाकारों ने देश भर में सुर्खियां बटोरी। इस मंच के संस्थापक श्री अनिल कुमार मुखर्जी के जन्मोत्सव पर सप्ताह भर चलने वाले इस नाट्य उत्सव में लोगों की भरपूर दिलचस्पी देखी जा रही है। जंगीराम की हवेली(निर्देशित-विजयेन्द्र),कागजी घोड़े(निर्देशित-प्रकाश प्रियदर्शी),हड़ताल,हड़ताल और हड़ताल(निर्देशित-धर्मेश), पालकी(निर्देशित-हसन ईमाम) जैसे नुक्कड़ नाटक भी इस दौरान रंगालय के बाहरी प्रांगण में प्रतिदिन 2.30 बजे दोपहर से प्रस्तुत किये जा रहे हैं। इस नाट्य मंच कालिदास रंगालय के संस्थापक स्व.अनिल मुखर्जी के जन्मतिथि के अवसर पर कई अन्य नाटक जिनका मंचन इस सप्ताह किया जा रहा है, वे हैं #बेटों की मां', निर्देशक-क्षीतिज प्रकाश  #विपलवी, निर्देशक-नीरज कुमार सिंह 'आदमीयत मंहगी है', निर्देशक-मुकेश कुमार, 'सूर्यास्त के बाद', निर्देशक-कृष्ण मोहन, 'आत्मा की खोज', निर्देशक-अविनाश किशोर, 'घर की मुर्गी दाल बराबर', निर्देशक-अनिल चतुर्वेदी और दो संक्षिप्त नाट्य मंचन 'दस दिन का आसन'निर्देशक-विनोद कुमार और 'रासप्रिया' निर्देशक-राजीव रंजन श्रीवास्तव। सूबे के प्रमुख नाट्य ग्रुप जैसे रंगकर्म, प्रयास, प्रवीण,सांस्कृतिक मंच, निर्वान कला मंच, विस्तार, माध्यम, कौमुदी, प्रेरणा, अदाकार ख्वायिश और इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसियशन इस नाट्य उत्सव मे भाग ले रहे हैं। पटना के बाहर से आए कलाकर्मियों में संरचना-मुजफ्फरपुर, निर्माण रंगमंच-हाजीपुर, नटराज आर्ट थियेटर-पंड़ारक प्रमुख हैं। शुक्रवार को नाट्योत्सव का समापन -अनिल कुमार मुखर्जी शिखर सम्मान-2012- सम्मान समारोह के साथ संपन्न होगा। इसके लिए कला मंच के दो शीर्षस्थ पहचान कृष्णा सिन्हा और निर्मल श्रीवास्तव को क्रमशः जमशेदपुर और वाराणशी से बुला लिया गया है।