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Job Conditions Paves Way For Divorce

Patna
Job Conditions Paves Way For Divorce
December 22, 2011

        ऐसा कानून, जो नौकरी तो दिला दे लेकिन पति-पत्नी को अलग करा दे, उचित नहीं हो सकता। अगर पंचायत या अन्य कोटि में संविदा पर नियुक्त शिछिकाओं के लिए ट्रांसफर का प्रावधान होता तो वे शादी के बाद, अपने पति से दूर रहने को मजबूर न होतीं। इस पद का अस्थानान्तरणुय (non-transferable)  होना नवविवाहित् शिछिकाओं की जिन्दगी जटिलताओं में उलझाता चला गया है और तलाक की घटनाएं बढ़ रहीं हैं।         इसी मकसद से गृह नियोजित शिक्षक शिवेन्द्र कुमार पाठक, सूरज कुमार सुरंजन व अन्य ने गुरूवार के पटना हाईकोर्ट मे याचिका दायर कर माध्यमिक शिक्षक (नियोजन एवं सेवा शर्त) २००६ की कंडिका १० को चुनौती दी है। इस कंडिका द्वारा शिक्षकों के पद को अस्थानांतरणीय बना दिया गया है। दरअसल, राज्य सरकार ने यह सोचकर ऐसा नियम बनाया कि पंचायत और नगर निकाय शिक्षक जिनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर महज ५०००-६००० रुपये प्रतिमाह पर की जाएगी, उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करना मुनासिब नहीं होगा। इससे उनका  जीवन निर्वाह और कठिन हो जाएगा। लेकिन प्रस्तुत याचिका ने न्यायालय का ध्यान एक अलग ही विडंबना की ओर आकृष्ट किया है।         य़ाचिका में कहा गया है कि जिन लड़कियों की नियुक्ति पंचायत शिक्षकों के पद पर हो गयी है वे शादी के बाद भी मायका छोड़ नहीं पा  रहीं हैं। वे कभी जनगणना तो कभी मिड-डे-मिल की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाती हैं। उन्हें विद्यालय से कभी छुट्टी ही नहीं मिल पाती है। परिणाम यह कि ससुराल वालों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ जाता है। उधर पति का ससुराल का बार-बार का चक्कर लगाना भी ठीक नहीं है। यदि नौकरी स्थानांतरणीय होती तो लड़की ससुराल के गांव में पदस्थापना तो करवा लेती। याचिकाकर्ता की मानें तो नियोजित शिक्षकों की नौकरी अस्थानांतरणीय होने के कारण तलाक की घटनायें बढ़ रहीं हैं।         दरअसल शादी के शुरुआती दिनों में तो नौकरी वाली बहुएं अच्छी लगती हैं पर कुछ दिनों में ही सब कुछ किरकिरा हो जाता है। अधिवक्ता शुर्‌ति सिन्हा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार को नियमावली में संशोधन कर देना चाहिए। इसके लिए हाईकोर्ट को नियमावली की उक्त शर्तों में परिवर्तन करने के लिए सरकार को आदेश देना चाहिए।

    ऐसा कानून, जो नौकरी तो दिला दे लेकिन पति-पत्नी को अलग करा दे, उचित नहीं हो सकता। अगर पंचायत या अन्य कोटि में संविदा पर नियुक्त शिछिकाओं के लिए ट्रांसफर का प्रावधान होता तो वे शादी के बाद, अपने पति से दूर रहने को मजबूर न होतीं। इस पद का अस्थानान्तरणुय (non-transferable)  होना नवविवाहित् शिछिकाओं की जिन्दगी जटिलताओं में उलझाता चला गया है और तलाक की घटनाएं बढ़ रहीं हैं।    इसी मकसद से गृह नियोजित शिछक शिवेन्द्र कुमार पाठक, सूरज कुमार सुरंजन व अन्य ने गुरूवार के पटना हाईकोर्ट मे याचिका दायर कर माध्यमिक शिछक (नियोजन एवं सेवा शर्त) २००६ की कंडिका १० को चुनौती दी है। इस कंडिका द्वारा शिछकों के पद को अस्थानांतरणीय बना दिया गया है। दरअसल, राज्य सरकार ने यह सोचकर ऐसा नियम बनाया कि पंचायत और नगर निकाय शिछक जिनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर महज ५०००-६००० रुपये प्रतिमाह पर की जाएगी, उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करना मुनासिब नहीं होगा। इससे उनका  जीवन निर्वाह और कठिन हो जाएगा। लेकिन प्रस्तुत याचिका ने न्यायालय का ध्यान एक अलग ही विडंबना की ओर आकृष्ट किया है।    य़ाचिका में कहा गया है कि जिन लड़कियों की नियुक्ति पंचायत शिछकों के पद पर हो गयी है वे शादी के बाद भी मायका छोड़ नहीं पा  रहीं हैं। वे कभी जनगणना तो कभी मिड-डे-मिल की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाती हैं। उन्हें विद्यालय से कभी छुट्टी ही नहीं मिल पाती है। परिणाम यह कि ससुराल वालों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ जाता है। उधर पति का ससुराल का बार-बार का चक्कर लगाना भी ठीक नहीं है। यदि नौकरी स्थानांतरणीय होती तो लड़की ससुराल के गांव में पदस्थापना तो करवा लेती। याचिकाकर्ता की मानें तो नियोजित शिछकों की नौकरी अस्थानांतरणीय होने के कारण तलाक की घटनायें बढ़ रहीं हैं।    दरअसल शादी के शुरुआती दिनों में तो नौकरी वाली बहुएं अच्छी लगती हैं पर कुछ दिनों में ही सब कुछ किरकिरा हो जाता है। अधिवक्ता शुर्‌ति सिन्हा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार को नियमावली में संशोधन कर देना चाहिए। इसके लिए हाईकोर्ट को नियमावली की उक्त शर्तों में परिवर्तन करने के लिए सरकार को आदेश देना चाहिए।